Thursday, 3 August 2023

मीठापुर का मनदीप, भारत का भरोसा

 



  पिता रवींद्र को हॉकी से मोहब्बत थी, चूँकि उस धरती को हॉकी से मोहब्बत थी जहाँ वो पैदा हुए थे; लेकिन बेटा तब पैदा हुआ, जब क्रिकेट भारत में बुलंदी चढ़ रहा था और सचिन देश के युवाओं का चेहरा बन रहा था। मीठापुर, पंजाब के जालंधर से महज़ 5 किमी दूर बसा वो गाँव जिसने अपने आँचल पर हॉकी को बसाया, जहाँ भारतीय हॉकी के सितारें- कुलवंत सिंह, स्वरूप सिंह और महान डिफेंडर प्रगट सिंह व वरुण कुमार और बेमिसाल मिडफील्डर मनप्रीत सिंह ने जन्म लिया। इसी गाँव में क्रिकेट के उस नवजात दीवाने ने भी जन्म लिया, जिसे आज भारतीय हॉकी का फर्राटा फॉरवर्ड मनदीप सिंह कहते हैं। मनदीप समेत ऊपर के सब नाम भारतीय हॉकी की ओलंपिक्स टीमों का हिस्सा रहे हैं। प्रगट सिंह ने जहाँ बैक-टू-बैक दो ओलंपिक्स (वर्ष 1992-96) में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी की, तो मनप्रीत सिंह बीते टोक्यो ओलंपिक, 2020 में ब्रांज मेडल विजेता टीम के कप्तान थे।


   मीठापुर के मनदीप ने आज भारत के लिए अपने 100 गोल पूर किए। मनदीप का सौवाँ गोल एशियन हॉकी चैंपियन ट्रॉफी के पहले मैच के दौरान उस मैदान आया, जिस पर उनके हमवतन मीठापुर के लीजेंड प्रगट सिंह की आख़िरी हॉकी मौजूदगी देखी गई थी। ठीक एक दशक पहले शुरू हुआ मनदीप का अंतर्राष्ट्रीय सफ़र आज दो सौ से ज़्यादा मैच और 100 गोल तक पहुँच गया। हॉकी इंडिया लीग से अपनी छाप छोड़ने वाले 28 साला मनदीप ने साल 2013 में राँची राइनो को ख़ूब ऊँचाइयाँ दीं। इसके बाद दिल्ली डेयरडेविल्स को अपने गोलों से नवाज़ा। साल 2016 में जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय हॉकी की रीढ़ रहे। पिछले साल एफ. आई. एच. हॉकी लीग के दौरान मनदीप के करिश्माई गोलों ने देशी हॉकी मुरीदों समेत विदेशियों को भी लट्टू कर दिया था। साल 2022 में मनदीप के ज़्यादातर गोल चौथे क्वार्टर में कई ज़रुरतों में आएं। इसी क़ाबिलियत के कारण उन्हें कभी-कभी 'मिस्टर फॉर्थ क्वार्टर' भी कहा गया। मनदीप की चपलता, सटीकता और उग्रता भारतीय हॉकी को एक अजेय फॉरवर्ड देती है।


  आगामी एशियन गेम्स, अगले साल का पेरिस ओलंपिक और इसके आगे बहुत कुछ है जो मनदीप के हाथों भारत के हिस्से आना है। अगले सौ नहीं, तौ और पचास का इंतज़ार रहेगा। बधाई मनदीप!


~अंकुर

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