क्या छह दिन के पदकीय सूखे के बाद नीरज चोपड़ा ही दिलाएगा वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत को एक पदक? आज सुबह यही सवाल था मेरे मन में, चूँकि चैंपियनशिप में नीरज की दस्तक आज थी। कॉमनवेल्थ के सितारें- अविनाश साबले, मुरली श्रीशंकर, एल्डहोस पॉल, अब्दुल्ला अबूबकर और अनुभवी अन्नू रानी में से कोई भी चमक न बिखेर सका और क्वालीफाईंग राउंड के टॉप 15 से भी बाहर रहा। भारतीय एथलेटिक्स की नई वूमेंस सनसनी और एशियन चैंपियंस ज्योथि और शैली भी क्रमशः 100 मी. हर्डल और लॉन्ग जंप में क्वालीफाई न कर सकीं। केवल 3000 मी. स्टीपलचेस में पारुल चौधरी और लॉन्ग जंप में जेस्विन एल्ड्रिन ही क्वालीफाई राउंड पास कर सकें, जिसमें से जेस्विन का सफ़र ख़त्म हो चुका है और पारुल चैंपियनशिप के समापन संडे को मेडल के लिए मैदान पर होगी।
आज तक पारुल की उपलब्धि ही इस चैंपियनशिप में भारत की साझा उपलब्धि थी, लेकिन आज तीनों भारतीय जेवलिन थ्रोअर ने टॉप 12 में शामिल होकर फाइनल में जगह बना ली; यानी अब समापन संडे को 4 भारतीय मेडल के लिए लड़ेंगे। यह ऐतिहासिक क्षण होगा। यदि भारत के इन 4 में से 2 खिलाड़ी भी मेडल जीत लेते हैं, तो वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के इतिहास में यह भारत का सर्वश्रेष्ठ संस्करणीय प्रदर्शन होगा। पारुल ने एक बार फिर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज़ किया है। ओरेगॉन, 2022 के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय 9:38:93 को पारुल इस बार 9:24:29 पर ले आई। उसकी रफ़्तार बीते मई माह के लॉस एंजिलिस के अपने समय से भी 5 सेकेंड तेज़ थी। इसी साल उसने जकार्ता एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी गोल्ड समेत दो मेडल जीते थे। उम्मीद है, पारुल संडे को भारत को एक मेडल अपने हिस्से से देगी।
आज जेवलिन थ्रो के मुकाबले में भारतीय गर्व और भरोसा, ओलंपियन नीरज ने सीज़न के सर्वश्रेष्ठ थ्रो 88.77 मी. के साथ टॉप 12 को टॉप किया। पिछली दो चैंपियनशिप के बैक-टू-बैक चैंपियन ग्रेनेडियन पीटर्स ने 78.49 मी. के मामूली-से थ्रो के साथ 36 खिलाड़ियों में 16वें स्थान पर समाप्त किया। आज पीटर्स ऐसे खेला, जैसे सूरज की जगह दीये ने ले ली हो। मानो! पीटर्स के क़द-मुखौटे में कोई नौसिखिया खेल रहा हो। जो जेवलिन जायंट छह की छह थ्रो को 90 मी. के ऊपर दागने का पेटेंट/एकाधिकार रखता हो, उसे आज 80 मी. के नीचे देखना, पोखर में खिले कमल की बनिस्बत मोबाइल स्क्रीन पर खोजे गए कमल को देखना बराबर था।
वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के 40 सालों के इतिहास में भारत अभी तक महज़ 2 मेडल (1-1 सिल्वर-ब्रांज) ही जीत पाया है, जबकि 37 साल के जूनियर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप सफ़र में भारत अभी तक 2 गोल्ड समेत कुल 10 मेडल जीत चुका है। इसी साल एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत ने 9 गोल्ड मेडल समेत कुल 27 मेडल जीते थे और इन्हीं में से कईं खिलाड़ी इस बार की बुडापेस्ट एथलेटिक्स चैंपियनशिप का हिस्सा हैं, जिनमें से अधिकतर ने निराश किया है। ग़ौरतलब है कि भारत को वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में साल 2003 के अंजू बॉबी जॉर्ज के लॉन्ग जंप ब्रांज मेडल के 19 साल बाद, पिछले साल नीरज की बदौलत अपना दूसरा मेडल नसीब हुआ था।
डी. पी. मनु, जिसने आज जेवलिन थ्रो में छठवें स्थान पर समाप्त किया, यदि मेडल जीतने में कामयाबी रहता है, तो नीरज के साथ पॉडियम फीनिश में होगा। यह भारत के वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के सफ़र में मील का पत्थर साबित होगा। नीरज के आज के प्रदर्शन ने उसके और भारत के पहले वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप गोल्ड की उम्मीद पुख़्ता कर दी।
~अंकुर
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