वंचितों व शोषितों की आवाज़ और उनके आंदोलन की धुरी बनने वाले को बाग़ी व देशद्रोही जैसा ही कुछ कहा जा सकता है, लिहाज़ा गुम्मदी विट्ठल राव को मोहब्बत से 'ग़द्दार' कहा गया। पहले आंध्र प्रदेश, तेलुगू भाषियों और फिर तेलंगाना राज्य के लिए हर वक़्त खड़े रहे ''लोगों के गीतकार' (प्रजा गयाकुडु) ने आज हैदराबाद में अपनी 77 बरस की ज़िंदगी को चिर विश्राम दे दिया। उनका जन्म तत्कालीन हैदराबाद प्रांत में तूप्रान (मेदक) में साल 1948 में हुआ था। उन्होंने इंजिनियरिंग की और बैंक में कर्मचारी भी रहें। उनकी पहचान कवि, सामाजिक कार्यकर्ता और नक्सली के तौर पर भी रही। लोग उन्हें "प्रजा युद्ध नौका" कहते थे। उन्हें अम्बेडकरवादी के रूप में भी जाना गया।
गुम्मदी ने कम्युनिस्ट पार्टी की सांस्कृतिक शाखा 'जन नाट्य मंडली' की स्थापना की थी। साल 2016 में ग़द्दार ने अपने बेटे की याद में डॉ. 'चंद्रकिरण पालमुरु युवजन संगम' शुरू किया था। साल 2016 में उन्होंने राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटित करने के बाद मल्काजगिरी में ग़रीबों के लिए एक सामुदायिक हॉल का निर्माण किया था।
गुम्मदी मतदान को एक व्यर्थ अभ्यास मानते थे। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पहली बार मतदान किया था। पिछले माह ही उन्होंने तेलंगाना के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए एक नई 'ग़द्दार प्रजा पार्टी' की घोषणा की थी। इसके पहले भी उन्होंने अपनी एक राजनीतिक पार्टी 'तेलंगाना प्रजा फ्रंट' बनाई थी, जो सफल नहीं हो सकी थी। वे इंजीलवादी के. ए. पॉल की प्रजा शांति पार्टी से भी जुड़े रहे हैं। अभिनेता से राजनेता बने के. पवन कल्याण को मदद की थी और उनकी चुनावी पार्टी को समर्थन देने की बात भी कही थी।
साल 1997 में उन पर कुछ अनामों द्वारा गोलियाँ चला दी गई थीं, जिनमें से कुछ अभी तक उनके शरीर में धँसी थीं। उनके निवास अलवल पर पाँच लोगों ने उन पर गोलियाँ दागी थीं, जिनमें से चार निकल गई थीं और एक आज तक उनकी रीढ़ में धँसी थीं, जो डॉक्टरों के मुताबिक गुम्मदी की ज़िंदगी की रीढ़ थी।
उन्होंने कुछ फिल्मों के लिए गीत लिखे और गाए भी। उन्होंने लोकप्रिय "बंदेंका बंदी कट्टी" गाना गाया, जिसे साल 1979 की फिल्म "माँ भूमि" में दिखाया गया था। उन्होंने "ओरे रिक्शा" के लिए "माले तेगाकु पांडिरिवोले" गीत लिखा और गाया, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीत का 'नंदी पुरस्कार' दिया गया। उन्होंने साल 2010 में 'जय भोलो तेलंगाना' में "पोद्दुमीदा गानमा तेलंगानामा" गीत को भी आवाज़ दी, जो तेलंगाना राज्य आंदोलन (साल 2008-14) के साथ पूरे तेलंगाना की आवाज़ बन गया।
~अंकुर

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