Sunday, 13 August 2023

भारत में जन्मीं ऑस्ट्रेलिया की 'हॉल ऑफ फेम' क्रिकेटर


 


  आंग्ल-भारतीय हेरेन और ऑस्ट्रेलियाई सू दंपती मुंबई में अपनी दूसरी संतान के रूप में बेटे की तलाश के लिए मुंबई के श्रीवास्तव अनाथालय आए थे, लेकिन जब उन्होंने महज़ तीन माह की एक नवजात लड़की की आँखों में देखा तो उन्हें एक उजला जहाँ नज़र आया। एक बेटी की नन्हीं नृत्यरत आँखों में उन्हें एक बेटे के बराबर का दर्ज़ा और फ़र्ज़ दिख रहा था। दंपती ने लैला नामक इस लड़की को गोद ले लिया और अमेरिका ले गए। फिर वहाँ से केन्या के रास्ते लैला अपने नवोदित ननिहाल ऑस्ट्रेलिया पहुँची, तो लिसा स्टालेकर बनकर ऑस्ट्रेलिया के वूमेंस क्रिकेट का अर्श बन गई और दुनिया के वूमेंस क्रिकेट की ख्याति।



(पिता के साथ स्टालेकर)


                                 (माता के साथ स्टालेकर)


  क्रिकेट के शौक़ीन पिता हेरेन ने "भारतीयों के ख़ून में ख़ूब रन होते हैं।" कहा, तो लिसा ने बैट-बॉल थाम लिया और ऐसे थामा कि वनडे क्रिकेट में  आज भी टॉप-10 वूमेंस हरफ़नमौला खिलाड़ियों में उनका नाम शुमार है। वनडे क्रिकेट में लगभग 3000 रनों और 150 विकेट्स के साथ में 2000 रन और 100 विकेट्स की अपनी हरफ़नमौला जुगलबंदी के साथ लिसा पहली अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर हैं।


  लिसा कर्पीरिनी स्थलेकर का जन्म भारतीय धरती पर 13 अगस्त, 1979 को पुणे (महाराष्ट्र) में एक अनजान पहचान के साथ हुआ था। अपनी हार्ड हिटिंग बल्लेबाजी और ऑफ स्पिन के लिए मशहूर स्टालेकर ने ऑस्ट्रेलियाई वूमेंस क्रिकेट पर एक लगभग दर्जन वर्षों (वर्ष 2001-2013) तक राज किया। साल 2017 में उन्होंने तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान करेन रोल्टन को पछाड़कर, ऑस्ट्रेलिया का 'वूमेंस इंटरनेशनल क्रिकेटर ऑफ द ईयर अवार्ड' जीता। साल 2017 में ही उन्होंने 'आईसीसी वूमेंस प्लेयर ऑफ द ईयर अवार्ड' भी जीता। स्टालेकर को साल 2022 में पाकिस्तानी ज़हीर अब्बास और द. अफ्रीकी हरफ़नमौला  जैक कैलिस के साथ आईसीसी के 'हॉल ऑफ फेम' में शामिल किया गया। यह उपलब्धि पाने वाली वे 27वीं ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर हैं और बेलिंडा क्लार्क, बेट्टी विल्सन, करेन रोल्टन और कैथरीन फिट्ज़पैट्रिक के बाद पाँचवीं ऑस्ट्रेलियाई महिला खिलाड़ी। वे साल 2007 और 2008 दोनों में प्रतिष्ठित 'बेलिंडा क्लार्क पुरस्कार' से भी सम्मानित हुईं, जो ऑस्ट्रेलिया की सर्वश्रेष्ठ महिला अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी का सम्मान होता है।



               (आईसीसी हॉल ऑफ फेम के तमग़े के साथ स्टालेकर)


  स्टालेकर ने ऑस्ट्रेलिया के महिला क्रिकेट की वो नींव रखी थी, जिस पर आज एक मज़बूत क्रिकेट किला आबाद है। 


  स्टालेकर ऑस्ट्रेलिया की चार विश्व कप विजेता टीमों का हिस्सा रहे हैं, जिसमें साल 2005 और 2013 के वनडे विश्व कप और साल 2010 और 2012 के टी-20 विश्व शामिल हैं। साल 2010 के टी-20 विश्व कप फाइनल के दौरान स्टालेकर ने जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जब ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ 106 रनों का बचाव करने में कामयाब रहा था। साल 2006-07 के भारत के 'ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड दौरे' को कौन भूल सकता है! इकलौते एडिलेड टेस्ट मैच में भारत को एक पारी और चार रन से शिकस्त मिली, जिसमें प्लेयर ऑफ द मैच रही स्टालेकर के अपने पैदाइशी देश को दिए बड़े झटकें शामिल थे। ऑस्ट्रेलिया के पहली और मैच की इकलौती पारी के 250 रनों में सर्वाधिक 72 रन स्टालेकर के थे। स्टालेकर ने भारत की दूसरी पारी में कप्तान मिताली राज और भारतीय कप्तान अंजुम चोपड़ा के विकेट्स समेत कुल 5 विकेट्स लिए थे। भारत की ओर से पहली पारी के टोटल 93 रन में ओपनर करुणा जैन ने सर्वाधिक 21 रन बनाए थे और दूसरी पारी के टोटल 153 में रोमिली धर ने सर्वाधिक 38 रन बनाए थे।


  स्टालेकर कैरेबियन 'मोहम्मद सिस्टर्स' में से एक ऑफ ब्रेक स्पिनर 'अनिशा मोहम्मद' के बाद वूमेंस वनडे क्रिकेट में कैच के सहारे विकेट्स लेने वाली दूसरी श्रेष्ठ (146 में से 80 विकेट्स) गेंदबाज हैं।


  स्टालेकर कईं मौकों पर महिला क्रिकेट का समर्थन करती रही हैं। भारतीय वूमेंस प्रीमियर लीग को लेकर भी उन्होंने बात रखी थी। भारतीय ओपनर वेदा कृष्णामूर्ति के चयन के सिलसिले में भी उन्होंने अपना बयान दिया था। 


 वर्तमान में स्टालेकर फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल क्रिकेट (FICA) की प्रेसीडेंट हैं, जोकि इस ओहदे को पाने वाली पहली महिला क्रिकेटर भी हैं। वर्तमान में वे वूमेंस प्रीमियर लीग की यूपी विजार्डस टीम की मेंटर भी हैं। साथ ही, वे राजस्थान रॉयल्स की पुरुष आईपीएल टीम की सलाहकार भी रही हैं। क्रिकेट कमेंट्री भी उन्होंने एक अलग पहचान बनाई है।


 स्टालेकर ने अपनी आत्मकथा 'शाकेर: रन मेकर, विकेट टेकर' भी लिखी है, जो उनके किरदार का बख़ूबी बयान करती है।




  ~अंकुर

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