Tuesday, 29 August 2023

आरिफ़ बना अशांत कश्मीर की खेल आवाज़

 

  



 भारत में स्कीइंग की बात होती है, तो मध्य-उच्च हिमालय की बर्फ़ से ढकी चोटियों पर नज़रें जाती हैं और भारत में स्कीइंग बतौर खेल बात होती है, तो एक नाम 'आरिफ़ ख़ान' ज़ेहन में आता है। यूँ तो विंटर ओलंपिक, 2022 में भारत की तरफ़ से 5 लोग बीजिंग गए थे, लेकिन इनमें खिलाड़ी इकलौता आरिफ़ था, जो 135 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व कर रहा था। ध्रुवीय देशों के जन्मजात स्कीयरों के बीच अल्पाइन स्कीइंग के स्लालोम इवेंट में आरिफ़ ने 16वें स्थान पर ख़त्म किया था। वहीं, जायंट स्लालोम में वह 30 के ऊपर रहा था। 


 33 साल के आरिफ़ ने जम्मू-कश्मीर जैसे अशांत प्रदेश में खेल की ऐसी अलख जगाई है, कि इसके केंद्रशासित प्रदेश के किरदार में आने के बाद यहाँ खेल युवाओं की न सिर्फ़ पसंद, बल्कि पेशा भी बनने लगा है। अनंतनाग से जन्में नवनिर्मित ज़िले गंदेरबल से 12 खिलाड़ियों ने प्रदेश के उन 56 खिलाड़ियों में जगह बनाई, जिन्होंने हाल ही में 7वीं स्काये (SQAY, एक कश्मीरी मार्शल आर्ट) एशियन चैंपियनशिप में भाग लिया था। इनमें 80% खिलाड़ियों ने मेडल जीते थे। 


 राज्य में अशांति को दूर करने और रोज़गार का सृजन करने के दुहरे मक़्सद से खेल को बढ़ावा देने हेतु खेल नीति लाई गई है। इस नीति में स्कूल स्तर के खिलाड़ियों को स्कॉलरशिप देने, एशियन-कॉमनवेल्थ-वर्ल्ड चैंपियनशिप और टूर्नामेंट्स के विजेताओं को पुरस्कृत करने व प्रदेश में खेल की आधारभूत संरचना की मज़बूती के लिए ज़ोर दिया गया है।


  ~अंकुर

5s हॉकी का पर्याय रहील

 

 




     आख़िर नौ साल पुराना ख़्वाब परवान चढ़ता जा रहा है। रहील ने साबित कर दिया कि बात 5s की होगी, तो मेरी पहले होगी। 'लुसाने 5s 5 नेशंस हाकी टूर्नामेंट' में रहील ने 5 मैचों  में 10 गोल दाग़े थे। पौलेंड के ख़िलाफ़ फाइनल में भारत जब 0-3 से पिछड़ रहा था, तब मैच को 6-2 के तिलिस्मी रिजल्ट पर ख़त्म करने में रहील की गोल हैट्रिक का बड़ा हाथ था।  

  रहील की शार्प-शूटिंग उसे हॉकी के टी-20 फॉर्मेट के लिए बिल्कुल मुफ़ीद बनाती है। गेंद पर झपटने और फिर उसे नेट पर पटकने की कला रहील को हॉकी 5s में भारत का हरमनप्रीत बनाती है। फुल-फ्लैग्ड हॉकी के पैनल्टी कॉर्नर में जो महारथ हरमनप्रीत के पास है, वही महारथ पैनल्टी-लेस 5s हॉकी में रहील रखता है।

  हॉकी के ख़ानदान से आने वाले रहील को राष्ट्रीय हॉकी में आने में 9 बरस लगें। साल 2014 में भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में भारतीय राष्ट्रीय हॉकी का मैच देखने पहुँचे रहील ने ख़्वाब सजाया था कि वो भी राष्ट्रीय हॉकी में खेलेगा, लेकिन दो बार राष्ट्रीय कैंप में शामिल होने के बावजूद भी उसे नीली जर्सी पहनने का मौक़ा न मिला। 

  हाल ही में जब 5s हॉकी ने अपने पाँव पसारे और इसके पहले अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट ने ज़मीन कब्ज़ाई, तो गुरिंदर सिंह और सुमित की कप्तानी-उपकप्तानी में रहील को भारत के पाँच फर्राटा खिलाड़ियों में शामिल किया गया। स्विट्जरलैंड की धरती पर रहील ने ऐसी धाक जमाई, कि साल 2022-23 की एफ. आई. एच. प्रो लीग में न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ फुल-फ्लैग्ड राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनकर मैदान में उतर गया। इसके बाद भी फिर सबकुछ सामान्य नहीं रहा।

   अब पहले '5s हॉकी वर्ल्ड कप' के लिए मैदान बन चुका था, भारत को पछाड़कर अरब खाड़ी मुल्क ओमान ने मेज़बानी की नीलामी जीत ली थी, भारत को 3 टीमों के एशिया क्वालीफायर के लिए खेलना था, तो राष्ट्रीय हॉकी चयनकर्ताओं की नज़रें 5s हॉकी स्पेशलिस्ट रहील की ओर दौड़ीं और बतौर भारतीय उप-कप्तान रहील वर्ल्ड कप से पहले ओमान सल्तनत के दक्षिणी शहर सलालाह पहुँच गया। बांग्लादेश के ख़िलाफ़ पहले मैच में रहील ने गोल हैट्रिक के साथ अपनी और भारत की शुरुआत वहीं से की, जहाँ लुसाने में छोड़ी थी। 

  भारत इस 5s हॉकी एशिया क्वालीफायर टूर्नामेंट में जापान, पाकिस्तान, चीन और मलेशिया जैसी असरदार टीमों के साथ खेल रहा है। ग़ौरतलब है कि भारतीय महिला टीम कल ही फाइनल में थाइलैंड को हराकर, एशिया से अपनी दावेदारी को तय कर चुकी है।


   ~अंकुर

Sunday, 27 August 2023

भारतीय चौकड़ी की नज़र मेडल पर

  

  



  बुडापेस्ट वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप ने अपनी शुरुआत पर जिस शिद्दत से निराश किया था, अंत में उतनी ही शिद्दत से ख़ुशी, रोमांच और उम्मीद दे रही है।


   वर्षीय अनुभवी स्प्रिंटर मो. अनस ने भारत की अगुवाई में पहली लेग रन की, तो भारत 9 टीमों के बीच 6वें नंबर पर था, लेकिन 400 मी. में नेशनल रिकॉर्ड रखने वाले अनस ने 9 टीमों के बीच भारत को उत्साहवर्धक बढ़त दी। दूसरी लेग में बेटन अमोल ने संभाला, जिसका 4*400 रिले में कोई ख़ास रिकॉर्ड नहीं था, लेकिन 5'11" कंद का अमोल आँधी बनकर दौड़ा और दूसरे 100 मी. में भारत 2 दूसरे नंबर पर आ गया। तीसरी और चौथी लेग में अजमल व राजेश, अमोल के बनाए हवाई दबाव में उड़ते चले गए और नतीज़ा, भारत ने अपनी हीट में ब्रिटेन और बोत्सवाना जैसे स्प्रिंट स्पेशल्स को पीछे छोड़ दिया। हीट में एशिया की चपला कही जाने वाली जापान न सिर्फ़ पीछे रही, बल्कि उसने अपना 4*400 एशिया रिले का रिकॉर्ड भी खो दिया। 


  हीट की आख़िरी लेग में राजेश ने अमेरिकी रॉबिनसन को छकाने की ख़ूब कोशिश की, लेकिन भारत महज़ 58 सेंटी सेकेंड से ही अमेरिका से पीछे रहा। इस तरह भारत दोनों हीट की कुल 17 टीमों में ओरेगॉन, 2022 और दोहा, 2019 की वर्ल्ड चैंपियनशिप की सिल्वर मेडलिस्ट जमैका और ब्रिटेन व बोत्सवाना जैसी स्प्रिंट धुरी को पछाड़ते हुए 2वें नंबर पर रुका।


  हालाँकि इन 17 टीमों में से 13 टीमों ने अपना सीजन बेस्ट प्रदर्शन किया, जबकि 2 ने नया नेशनल रिकॉर्ड क़ायम किया। 2:58:47 पर ख़त्म करनी वाली अमेरिका अपने पर्सनल बेस्ट 2:54:29 और सीजन बेस्ट 2:57:78 से बहुत पीछे रही। भारत ने बीती मई के एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के अपने सिल्वर मेडल टाइम 3:1:80 को भी बहुत पीछे छोड़ दिया और ओरेगॉन एथलेटिक्स चैंपियनशिप, 2022 में बनाए जापानी एशियन रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया, जो उसने भारत (टोक्यो ओलंपिक में 3:00:25 में दर्ज़) से ही छीना था।


  अब भारत जिन 9 टीमों के बीच मेडल के लिए दौड़ेगा, उनमें से सभी का पर्सनल बेस्ट भारत से ज़्यादा है, लेकिन खेल में वक़्त की लय और फॉर्म भी बहुत कुछ तय करती है, जो अभी भारत के पास है। लिहाज़ा, आज भारत की चपल चौकड़ी, 4*400 रिले दौड़ में इतिहास के बाद स्वर्ण, रजत या कांस्य रंग के साथ स्वर्णिम इतिहास रच सकती है। पिछली दो चैंपियनशिप की गोल्ड मेडलिस्ट और 4*400 रिले स्प्रिंट की क्वीन अमेरिका का गोल्ड या मेडल कोई तिलिस्म ही छीन सकता है। भारत के आगे ब्रिटेन, बोत्सवाना और जमैका ही बड़े प्रतिद्वंद्वी हैं, जिनके साथ मेडल की छीन-झपट रहेगी। हीट 1 में भारत के पीछे ब्रिटेन और बोत्सवाना ने संयुक्त रूप से 95 सेंटी सेकेंड के अंतर के साथ ख़त्म किया था, जबकि हीट 2 टॉपर जमैका ही रही थी।


  ~अंकुर

Friday, 25 August 2023

वर्ल्ड की निगाहों में नीरज

 



   क्या छह दिन के पदकीय सूखे के बाद नीरज चोपड़ा ही दिलाएगा वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत को एक पदक? आज सुबह यही सवाल था मेरे मन में, चूँकि चैंपियनशिप में नीरज की दस्तक आज थी। कॉमनवेल्थ के सितारें- अविनाश साबले, मुरली श्रीशंकर, एल्डहोस पॉल, अब्दुल्ला अबूबकर और अनुभवी अन्नू रानी में से कोई भी चमक न बिखेर सका और  क्वालीफाईंग राउंड के टॉप 15 से भी बाहर रहा। भारतीय एथलेटिक्स की नई वूमेंस सनसनी और एशियन चैंपियंस ज्योथि और शैली भी क्रमशः 100 मी. हर्डल और लॉन्ग जंप में क्वालीफाई न कर सकीं। केवल 3000 मी. स्टीपलचेस में पारुल चौधरी और लॉन्ग जंप में जेस्विन एल्ड्रिन ही क्वालीफाई राउंड पास कर सकें, जिसमें से जेस्विन का सफ़र ख़त्म हो चुका है और पारुल चैंपियनशिप के समापन संडे को मेडल के लिए मैदान पर होगी। 


   आज तक पारुल की उपलब्धि ही  इस चैंपियनशिप में भारत की साझा उपलब्धि थी, लेकिन आज तीनों भारतीय जेवलिन थ्रोअर ने टॉप 12 में शामिल होकर फाइनल में जगह बना ली; यानी अब समापन संडे को 4 भारतीय मेडल के लिए लड़ेंगे। यह ऐतिहासिक क्षण होगा। यदि भारत के इन 4 में से 2 खिलाड़ी भी मेडल जीत लेते हैं, तो वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के इतिहास में यह भारत का सर्वश्रेष्ठ संस्करणीय प्रदर्शन होगा।  पारुल ने एक बार फिर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज़ किया है। ओरेगॉन, 2022 के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय 9:38:93 को पारुल इस बार 9:24:29 पर ले आई।  उसकी रफ़्तार बीते मई माह के लॉस एंजिलिस के अपने समय से भी 5 सेकेंड तेज़ थी। इसी साल उसने जकार्ता एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी गोल्ड समेत दो मेडल जीते थे। उम्मीद है, पारुल संडे को भारत को एक मेडल अपने हिस्से से देगी।


   आज जेवलिन थ्रो के मुकाबले में भारतीय गर्व और भरोसा, ओलंपियन नीरज ने सीज़न के सर्वश्रेष्ठ थ्रो 88.77 मी. के साथ टॉप 12 को टॉप किया। पिछली दो चैंपियनशिप के बैक-टू-बैक चैंपियन ग्रेनेडियन पीटर्स ने 78.49 मी. के मामूली-से थ्रो के साथ 36 खिलाड़ियों में 16वें स्थान पर समाप्त किया। आज पीटर्स ऐसे खेला, जैसे सूरज की जगह दीये ने ले ली हो। मानो! पीटर्स के क़द-मुखौटे में कोई नौसिखिया खेल रहा हो। जो जेवलिन जायंट छह की छह थ्रो को 90 मी. के ऊपर दागने का पेटेंट/एकाधिकार रखता हो, उसे आज 80 मी. के नीचे देखना, पोखर में खिले कमल की बनिस्बत मोबाइल स्क्रीन पर खोजे गए कमल को देखना बराबर था। 


  वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के 40 सालों के इतिहास में भारत अभी तक महज़ 2 मेडल (1-1 सिल्वर-ब्रांज) ही जीत पाया है, जबकि 37 साल के जूनियर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप सफ़र में भारत अभी तक 2 गोल्ड समेत कुल 10 मेडल जीत चुका है। इसी साल एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत ने 9 गोल्ड मेडल समेत कुल 27 मेडल जीते थे और इन्हीं में से कईं खिलाड़ी इस बार की बुडापेस्ट एथलेटिक्स चैंपियनशिप का हिस्सा हैं, जिनमें से अधिकतर ने निराश किया है। ग़ौरतलब है कि भारत को वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में साल 2003 के अंजू बॉबी जॉर्ज के लॉन्ग जंप ब्रांज मेडल के 19 साल बाद, पिछले साल नीरज की बदौलत अपना दूसरा मेडल नसीब हुआ था।


  डी. पी. मनु, जिसने आज जेवलिन थ्रो में छठवें स्थान पर समाप्त किया, यदि मेडल जीतने में कामयाबी रहता है, तो नीरज के साथ पॉडियम फीनिश में होगा। यह भारत के वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के सफ़र में मील का पत्थर साबित होगा। नीरज के आज के प्रदर्शन ने उसके और भारत के पहले वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप गोल्ड की उम्मीद पुख़्ता कर दी।


 ~अंकुर

Wednesday, 23 August 2023

कारमोना का स्पेन

 




  जब कोई खिलाड़ी खेलता है, तो वह अकेला नहीं खेलता, उसका पूरा परिवार उसके साथ खेलता है। जब बात देश के गौरव से जुड़ी हो, तो खिलाड़ी और उसका परिवार ख़ुद को भुला देता है। देश की सफलता में ही खिलाड़ी की असल सफलता होती है, ख़ासकर टीम खेलों में। खेल में अंनत भावनाएँ होती हैं। खेल सिर्फ़ मैदान तक में नहीं बंधा होता है, बल्कि यह देश और समाज के सुख-दुख से भी सरोकार रखता है। देशीय गौरव से ज़्यादा, देशीय सरोकार खेल के लिए ख़ास है और इसी मूल भावना-उद्देश्य की अभिव्यक्ति और प्राप्ति के लिए खेल का सृजन हुआ है।

   महज़ 23 साल की 'ओल्गा कारमोना' स्पेन के लिए पहली विश्व कप उपलब्धि हेतु इत्तिफ़ाक़न बतौर कप्तान मैदान पर उतरी थीं। कारमोना को यह ज़िम्मेदारी अनुभवी मिडफील्डर एंड्रेस और फॉरवर्ड गुंजालेज़ के ऊपर तरजीही में मिली थी। अब इसे विश्व रैंकिंग की नंबर दो टीम स्वीडन के ख़िलाफ़ सेमीफाइनल में उनके ऐतिहासिक गोल की बदौलत समझें या बतौर विंगर उनकी मुस्तैदी व मूव के बदौलत। कारमोना ने अपने सेमीफाइनल के खेल को फाइनल में सिडनी के मैदान पर ज्यो-का-त्यों उतार दिया और अपनी दमदार ठोकर से मैच का इकलौता विजयी गोल भी दागा। ज़श्न में कारमोना ने अपनी टी शर्ट उठाकर, दोस्त की उस माँ को गोल्डन गोल और विश्व कप की ट्रॉफी समर्पित कर दी, जो अब इस दुनिया में नहीं थीं। अब कारमोना को दो दिन पहले ही गुज़रे अपने बाप की ख़बर मिली, तो कारमोना के पास समर्पित करने के लिए सिवा गर्वित आँसुओं के कुछ नहीं था। कारमोना को विश्व विजेता और जुझारू खिलाड़ी बनाने में इस बाप का ही हाथ था, जिसने कारमोना की स्विमिंग-टेनिस क़ाबिलियत के ऊपर फुटबॉल को तरजीह दी थी।

    फेडरेशन और कोच से जुड़े विवादों के बीच स्पेन सैंड्रा पनोस, मापी लियोन, गुइजरो और पीना जैसे अपने अनुभवी खिलाड़ियों के बगैर खेल रहा था। लायनेसेज/इंग्लैंड भी पहली बार फाइनल में था। यह वही इंग्लैंड था जो बीते बरस यूरोज (यूरोपियन ट्रॉफी) में स्पेन को क्वार्टर फाइनल में हरा चुका था, लेकिन इस बार स्पेन वही न था। यह वो स्पेन था, जिसने यूरोज के बाद से 11 में से 10 मैच जीते थे। लिहाज़ा, विश्व कप में जापान से इकलौती हार के सिवा स्पेन ने कोई मैच नहीं हारा और पुरुष फुटबॉल विश्व कप समेत महिला फुटबॉल विश्व कप जीतने वाला दुनिया का दूसरा देश बन गया। दुनिया की छह नंबरी टीम विश्व चैंपियन बन गई। धरती को अपने पाँवों से नापने वाली ला रोज़ा टीम में, सेमीफाइनल और फाइनल में ऐतिहासिक गोल करने वाली कारमोना की बेजोड़ दौड़ रही है।


~अंकुर


Sunday, 13 August 2023

भारत में जन्मीं ऑस्ट्रेलिया की 'हॉल ऑफ फेम' क्रिकेटर


 


  आंग्ल-भारतीय हेरेन और ऑस्ट्रेलियाई सू दंपती मुंबई में अपनी दूसरी संतान के रूप में बेटे की तलाश के लिए मुंबई के श्रीवास्तव अनाथालय आए थे, लेकिन जब उन्होंने महज़ तीन माह की एक नवजात लड़की की आँखों में देखा तो उन्हें एक उजला जहाँ नज़र आया। एक बेटी की नन्हीं नृत्यरत आँखों में उन्हें एक बेटे के बराबर का दर्ज़ा और फ़र्ज़ दिख रहा था। दंपती ने लैला नामक इस लड़की को गोद ले लिया और अमेरिका ले गए। फिर वहाँ से केन्या के रास्ते लैला अपने नवोदित ननिहाल ऑस्ट्रेलिया पहुँची, तो लिसा स्टालेकर बनकर ऑस्ट्रेलिया के वूमेंस क्रिकेट का अर्श बन गई और दुनिया के वूमेंस क्रिकेट की ख्याति।



(पिता के साथ स्टालेकर)


                                 (माता के साथ स्टालेकर)


  क्रिकेट के शौक़ीन पिता हेरेन ने "भारतीयों के ख़ून में ख़ूब रन होते हैं।" कहा, तो लिसा ने बैट-बॉल थाम लिया और ऐसे थामा कि वनडे क्रिकेट में  आज भी टॉप-10 वूमेंस हरफ़नमौला खिलाड़ियों में उनका नाम शुमार है। वनडे क्रिकेट में लगभग 3000 रनों और 150 विकेट्स के साथ में 2000 रन और 100 विकेट्स की अपनी हरफ़नमौला जुगलबंदी के साथ लिसा पहली अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर हैं।


  लिसा कर्पीरिनी स्थलेकर का जन्म भारतीय धरती पर 13 अगस्त, 1979 को पुणे (महाराष्ट्र) में एक अनजान पहचान के साथ हुआ था। अपनी हार्ड हिटिंग बल्लेबाजी और ऑफ स्पिन के लिए मशहूर स्टालेकर ने ऑस्ट्रेलियाई वूमेंस क्रिकेट पर एक लगभग दर्जन वर्षों (वर्ष 2001-2013) तक राज किया। साल 2017 में उन्होंने तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान करेन रोल्टन को पछाड़कर, ऑस्ट्रेलिया का 'वूमेंस इंटरनेशनल क्रिकेटर ऑफ द ईयर अवार्ड' जीता। साल 2017 में ही उन्होंने 'आईसीसी वूमेंस प्लेयर ऑफ द ईयर अवार्ड' भी जीता। स्टालेकर को साल 2022 में पाकिस्तानी ज़हीर अब्बास और द. अफ्रीकी हरफ़नमौला  जैक कैलिस के साथ आईसीसी के 'हॉल ऑफ फेम' में शामिल किया गया। यह उपलब्धि पाने वाली वे 27वीं ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर हैं और बेलिंडा क्लार्क, बेट्टी विल्सन, करेन रोल्टन और कैथरीन फिट्ज़पैट्रिक के बाद पाँचवीं ऑस्ट्रेलियाई महिला खिलाड़ी। वे साल 2007 और 2008 दोनों में प्रतिष्ठित 'बेलिंडा क्लार्क पुरस्कार' से भी सम्मानित हुईं, जो ऑस्ट्रेलिया की सर्वश्रेष्ठ महिला अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी का सम्मान होता है।



               (आईसीसी हॉल ऑफ फेम के तमग़े के साथ स्टालेकर)


  स्टालेकर ने ऑस्ट्रेलिया के महिला क्रिकेट की वो नींव रखी थी, जिस पर आज एक मज़बूत क्रिकेट किला आबाद है। 


  स्टालेकर ऑस्ट्रेलिया की चार विश्व कप विजेता टीमों का हिस्सा रहे हैं, जिसमें साल 2005 और 2013 के वनडे विश्व कप और साल 2010 और 2012 के टी-20 विश्व शामिल हैं। साल 2010 के टी-20 विश्व कप फाइनल के दौरान स्टालेकर ने जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जब ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ 106 रनों का बचाव करने में कामयाब रहा था। साल 2006-07 के भारत के 'ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड दौरे' को कौन भूल सकता है! इकलौते एडिलेड टेस्ट मैच में भारत को एक पारी और चार रन से शिकस्त मिली, जिसमें प्लेयर ऑफ द मैच रही स्टालेकर के अपने पैदाइशी देश को दिए बड़े झटकें शामिल थे। ऑस्ट्रेलिया के पहली और मैच की इकलौती पारी के 250 रनों में सर्वाधिक 72 रन स्टालेकर के थे। स्टालेकर ने भारत की दूसरी पारी में कप्तान मिताली राज और भारतीय कप्तान अंजुम चोपड़ा के विकेट्स समेत कुल 5 विकेट्स लिए थे। भारत की ओर से पहली पारी के टोटल 93 रन में ओपनर करुणा जैन ने सर्वाधिक 21 रन बनाए थे और दूसरी पारी के टोटल 153 में रोमिली धर ने सर्वाधिक 38 रन बनाए थे।


  स्टालेकर कैरेबियन 'मोहम्मद सिस्टर्स' में से एक ऑफ ब्रेक स्पिनर 'अनिशा मोहम्मद' के बाद वूमेंस वनडे क्रिकेट में कैच के सहारे विकेट्स लेने वाली दूसरी श्रेष्ठ (146 में से 80 विकेट्स) गेंदबाज हैं।


  स्टालेकर कईं मौकों पर महिला क्रिकेट का समर्थन करती रही हैं। भारतीय वूमेंस प्रीमियर लीग को लेकर भी उन्होंने बात रखी थी। भारतीय ओपनर वेदा कृष्णामूर्ति के चयन के सिलसिले में भी उन्होंने अपना बयान दिया था। 


 वर्तमान में स्टालेकर फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल क्रिकेट (FICA) की प्रेसीडेंट हैं, जोकि इस ओहदे को पाने वाली पहली महिला क्रिकेटर भी हैं। वर्तमान में वे वूमेंस प्रीमियर लीग की यूपी विजार्डस टीम की मेंटर भी हैं। साथ ही, वे राजस्थान रॉयल्स की पुरुष आईपीएल टीम की सलाहकार भी रही हैं। क्रिकेट कमेंट्री भी उन्होंने एक अलग पहचान बनाई है।


 स्टालेकर ने अपनी आत्मकथा 'शाकेर: रन मेकर, विकेट टेकर' भी लिखी है, जो उनके किरदार का बख़ूबी बयान करती है।




  ~अंकुर

Saturday, 12 August 2023

हरमनप्रीत के हॉकी चैंपियन

 


   

   स्पीडी टाइगर्स ने पहले हॉफ में 1 गोल से पिछड़ने के बाद 3-1 की स्पीड दिखाई और फाइनल के रोमांच को बढ़ा दिया। असारी, सारी, रहीम, अराई, जलील, जली और हसन जैसे अनुभवी खिलाड़ियों और नवोदित फॉरवर्ड शेलो के बलबूते एशियन चैंपियनशिप ट्रॉफी के अपने पहले सिल्वर मेडल को पहले ही तय कर ही चुके मलेशिया ने अंतर्राष्ट्रीय हॉकी के पहले गोल्ड की हुंकार भर ली थी, लेकिन 'मेन इन ब्ल्यू' ऐसे मुश्किल रास्तों पर न सिर्फ़ चलना जानते हैं, बल्कि छलांग लगाकर पार करना जानते हैं। 


  दूसरे हॉफ में दुनिया की नौ नंबरी टीम ने चार नंबरी टीम को अपनी असल स्पीड और हासिल हुनर दिखाने को मज़बूर किया। देखते-देखते हरमनप्रीत का पैनल्टी स्ट्रोक, कार्थी-शमशेर-गुरजंत का ट्राई-ट्रायंफ गोल्डन फील्ड गोल और फॉरवर्ड आकाशदीप के ज़बरदस्त स्ट्रोक ने छह मिनट्स रहते भारत को लीड और जीत दे दी।


   एशियन हॉकी के अघोषित विजेताओं ने अपने चैंपियन होने की घोषणा कर दी और पिछले बरस छिना ताज़ फिर अपने सिर कर लिया। 27 सालों बाद हॉकी में लौटे मेजर राधाकृष्णन स्टेडियम ने भारतीय जीत के साथ अपने नए सफ़र की शुरुआत की। उम्मीद है, कार्थी-श्रीजेश और चेन्नई की सफलता के साथ भारतीय हॉकी, अब पूरे भारत के सफ़र पर निकलेगी और उत्तर-मध्य से दक्कनी पठार के निचले छोर तक जाकर हॉकी हीरे तैयार करेगी।


 कार्थी ने मैच का यूथ प्लेयर अवार्ड समेत टूर्नामेंट का फैन चाइस अवार्ड भी अपने नाम किया। टूर्नामेंट से एक नाम क़ाबिल-ए-गौर यहाँ उस टीम से भी है, जो टूर्नामेंट में पाँचवें स्थान पर रही। पाकिस्तान, वही टीम जो एशिया का जूनियर हॉकी कप जीतकर आई थी, सीनियर के बीच आकर किसी मेडल पायदान पर न ठहर सकी, लेकिन इस टीम से एक नाम 'अब्दुल हनान शाहिद' को याद रखिए, भविष्य में पीछे नहीं आना पड़ेगा। 


   18 बरस का फॉरवर्ड हनान बहुत आगे तक जाने वाला है। यह न सिर्फ़ पाकिस्तानी और एशियन हॉकी में, बल्कि वैश्विक हॉकी में भी एक बड़े किरदार पर हक़ दर्ज़ करेगा। जूनियर एशिया हॉकी कप में राइजिंग प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट रहा हनान, इस हॉकी चैंपियनशिप का प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट चुना गया। द. कोरिया के साथ पाकिस्तान के ड्रा हुए मैच के इकलौते हनानी गोल को याद रखा जाएगा। हनान एशियन हॉकी का इमर्जिंग प्लेयर, 2023 भी चुना जा चुका है।


~अंकुर

Sunday, 6 August 2023

फुटबॉल चैंपियन यूएसए विश्व कप से बाहर

 



     5'11'' क़द की स्वीडिश गोलरक्षक जेरिक मुकोरिव ने 120 मिनट्स तक चले मैच में स्मिथ, रैपिनो और मॉर्गन जैसे दमदार स्ट्राइकरों को बेअसर कर दिया और कुल 11 सेव करकर 'द स्टार्स और स्ट्राइप्स' को लगातार तीसरा विश्व कप जीतने से रोक दिया। जेरिक ने न सिर्फ़ अमेरिकी वूमेंस के अजेय सफ़र को रोका, बल्कि दुनिया की नंबर एक टीम को विश्व कप इतिहास में पहली बार सेमीफाइनल स्टेज से बाहर होने का दुर्भाग्य और दुर्दिन भी दिया। 


  अमेरिका के साथ मेहनत ज़रूर रही, लेकिन क़िस्मत स्वीडन के ही साथ थी, जो मेहनत दरकिनार करते हुए मैच को सडेन डेथ में लेकर गई और अमेरिकी गोलरक्षक एलिसा नाहर का 11 साल का तजुर्बा और सारा पेंच नाकामयाब हो गया। वी.ए.आर. ने हर्टिंग के हवाले से स्वीडन को लगातार तीसरी बार विश्व कप जीतने का इरादा लेकर आई अमेरिका को तीन मैच जीते बगैर घर लौटने को मज़बूर कर दिया।


  नॉक आउट से अमेरिका की इस हार के साथ कोच व्लाटको एंडोनोवस्की पर लगे टीम प्रबंधन के आरोप भी पुख़्ता हो गए। विश्व कप दल के 23 खिलाड़ियों में शामिल हुए 14 नए खिलाड़ी एक पुरानी 38 साला फॉरवर्ड मैगन रैपिनो को अपना आख़िरी विश्व कप जीतने में सहारा न बन सकें।


  ग्रुप स्टेज में ब्राजील और जर्मनी ने हारकर, अपने लिए बुरा इतिहास बनाया था, तो नॉक स्टेज में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम ने अपनी एक नाकामयाब इबारत लिखी।


~अंकुर

ग़द्दारी और गायकी में छिपी शख़्सियत 'गुम्मदी राव'

 



   वंचितों व शोषितों की आवाज़ और उनके आंदोलन की धुरी बनने वाले को बाग़ी व देशद्रोही जैसा ही कुछ कहा जा सकता है, लिहाज़ा गुम्मदी विट्ठल राव को मोहब्बत से 'ग़द्दार' कहा गया। पहले आंध्र प्रदेश, तेलुगू भाषियों और फिर तेलंगाना राज्य के लिए हर वक़्त खड़े रहे ''लोगों के गीतकार' (प्रजा गयाकुडु) ने आज हैदराबाद में अपनी 77 बरस की ज़िंदगी को चिर विश्राम दे दिया। उनका जन्म तत्कालीन हैदराबाद प्रांत में तूप्रान (मेदक) में साल 1948 में हुआ था। उन्होंने इंजिनियरिंग की और बैंक में कर्मचारी भी रहें। उनकी पहचान कवि, सामाजिक कार्यकर्ता और नक्सली के तौर पर भी रही। लोग उन्हें "प्रजा युद्ध नौका" कहते थे। उन्हें अम्बेडकरवादी के रूप में भी जाना गया।  


  गुम्मदी ने कम्युनिस्ट पार्टी की सांस्कृतिक शाखा 'जन नाट्य मंडली' की स्थापना की थी। साल 2016 में ग़द्दार ने अपने बेटे की याद में डॉ. 'चंद्रकिरण पालमुरु युवजन संगम' शुरू किया था। साल 2016 में उन्होंने राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटित करने के बाद मल्काजगिरी में ग़रीबों के लिए एक सामुदायिक हॉल का निर्माण किया था।


  गुम्मदी मतदान को एक व्यर्थ अभ्यास मानते थे। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पहली बार मतदान किया था। पिछले माह ही उन्होंने तेलंगाना के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए एक नई 'ग़द्दार प्रजा पार्टी' की घोषणा की थी। इसके पहले भी उन्होंने अपनी एक राजनीतिक पार्टी 'तेलंगाना प्रजा फ्रंट' बनाई थी, जो सफल नहीं हो सकी थी। वे इंजीलवादी के. ए. पॉल की प्रजा शांति पार्टी से भी जुड़े रहे हैं। अभिनेता से राजनेता बने के. पवन कल्याण को मदद की थी और उनकी चुनावी पार्टी को समर्थन देने की बात भी कही थी।


 साल 1997 में उन पर कुछ अनामों द्वारा गोलियाँ चला दी गई थीं, जिनमें से कुछ अभी तक उनके शरीर में धँसी थीं। उनके निवास अलवल पर पाँच लोगों ने उन पर गोलियाँ दागी थीं, जिनमें से चार निकल गई थीं और एक आज तक उनकी रीढ़ में धँसी थीं, जो डॉक्टरों के मुताबिक गुम्मदी की ज़िंदगी की रीढ़ थी।


   उन्होंने कुछ फिल्मों के लिए गीत लिखे और गाए भी। उन्होंने लोकप्रिय "बंदेंका बंदी कट्टी" गाना गाया, जिसे साल 1979 की फिल्म "माँ भूमि" में दिखाया गया था। उन्होंने "ओरे रिक्शा" के लिए "माले तेगाकु पांडिरिवोले" गीत लिखा और गाया, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीत का 'नंदी पुरस्कार' दिया गया। उन्होंने साल 2010 में 'जय भोलो तेलंगाना' में "पोद्दुमीदा गानमा तेलंगानामा" गीत को भी आवाज़ दी, जो तेलंगाना राज्य आंदोलन (साल 2008-14) के साथ पूरे तेलंगाना की आवाज़ बन गया।


 ~अंकुर

Saturday, 5 August 2023

कैट-आई ग्लास-फ्रेम की जनक अल्टीना शिनासी

 




   कल गूगल ने अपने डूडल के ज़रिये, 'कैट-आई' ग्लास-फ्रेम की जनक अल्टीना शिनासी को उनकी 116वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी।

 

कौन थीं अल्टीना?

 अल्टीना 4 अगस्त, 1907 को मैनहट्टन (अमेरिका) में जन्मी थीं। इनके माता-पिता अमेरिकी प्रवासी थे, माता सलोनिया की मूल निवासी थी, जबकि पिता एक तुर्क थे। इन्होंने शुरुआत में  पेरिस से पेंटिंग की पढ़ाई की, बाद में पढ़ाई के लिए ये न्यूयॉर्क आई गई थीं। फिर इन्होंने विंडो ड्रेसर के तौर काम शुरू किया। ये मशहूर आर्टिस्ट सल्वाडोर डाली और जॉर्ज ग्रॉज़ से बहुत प्रेरित थीं।

 



 कैट-आई फ्रेम का आइडिया और इसकी प्रसिद्धि  

 विंडो डिस्प्ले डिजाइनर के रूप में काम करते हुए अल्टीना 'कैट-आई' फ्रेम के निर्माण के लिए प्रेरित हुई थीं। पास के एक ऑप्टिशियन के कार्यालय की खिड़की पर उन्होंने देखा कि महिलाओं के चश्मे के लिए एकमात्र विकल्प/डिज़ाइन ‘गोल फ्रेम’ होते हैं। इस अवलोकन ने शिनासी को महिलाओं के लिए एक अलग विकल्प/डिज़ाइन तैयार करने को प्रेरित किया। उन्होंने हार्लेक्विन मुखौटों के आकार की नकल की, जिसे उन्होंने कार्नेवेल उत्सव के दौरान वेनिस (इटली) में लोगों को पहने हुए देखा था, और एक अनूठा चश्मा-फ्रेम बना दिया। शिनासी के डिज़ाइन को सभी प्रमुख निर्माताओं ने अस्वीकार कर दिया था, लेकिन उसने हार नहीं मानी। आख़िर, शिनासी की किस्मत तब चमकी, जब एक स्थानीय दुकान के मालिक ने उसकी रचनात्मक सोच को सम्मान दिया और उससे एक विशेष डिजाइन मांगा। हार्लेक्विन चश्मा (कैट-आई) ख़ूब ख्याति मिली और शिनासी अमेरिका में एक मशहूर चेहरा बन गईं।

  हार्लेक्विन चश्मा साल 1930 के दशक के अंत और साल 1940 के दशक तक एक ख़ूबसूरत फैशन एक्सेसरी बन गया। शिनासी को इस आविष्कार के लिए साल 1939 में ‘लॉर्ड एंड टेलर डिज़ाइन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया था और साथ ही, वोग (प्रसिद्द अमेरिकी मासिक फैशन और लाइफस्टाइल मैगजीन) और लाइफ (अपनी फोटोग्राफी/फोटोग्राफ्स के लिए प्रसिद्द रही) सहित प्रमुख मैगजींस द्वारा भी उन्हें सरहाया गया था। आज 100 सालो बाद भी  कैट-आई डिज़ाइन दुनियाभर में फैशन एक्सेसरी में अपना रुतबा रखता है।

 

 

हार्लेक्विन मुखौटा भी जानें, आख़िर क्या है!

  हार्लेक्विन कॉमेडी पात्रों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एक  मुखौटे को हार्लेक्विन मुखौटा कहा जाता है। हार्लेक्विन नाम फ्रांसीसी ‘शैतानी नाटकों’ के शैतान/राक्षस चरित्र से लिया गया है। इसकी उत्पत्ति एक पुराने फ्रांसीसी शब्द हेर्लेक्विन/हेलेक्विन से हुई मानी जाती है। इसकी पुष्टि पहली बार 11वीं सदी में इतिहासकार 'ऑर्डरिक विटालिस' ने की थी। उन्होंने एक भिक्षु, जिसका नॉर्मंडी (फ्रांस) के तट पर शैतानों ने एक रात को पीछा किया था, की कहानी में इसका ज़िक्र किया था। इन राक्षसों का नेतृत्व एक मुखौटाधारी/नक़ाबपोश और विशालकाय शैतान द्वारा किया गया था, जिसे 'फैमिलिया हर्लेक्विन' के नाम से जाना जाता था।

 हार्लेक्विन इटालियन 'कमेडिया डेल आर्टे' के जैनी या कॉमिक सेवक पात्रों में सबसे प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि यह पात्र-भूमिका 16वीं सदी के अंत में 'जैन गनासा' द्वारा पेश की गई थी और इसे साल 1584-1585 में पेरिस में इतालवी अभिनेता 'ट्रिस्टानो मार्टिनेली' द्वारा लोकप्रिय बनाया गया था, जो साल 1630 में उनकी मृत्यु के बाद एक मशहूर चरित्र बन गया था।

 



शिनासी और सिनेमा

  शिनासी ने सिने दुनिया में भी हाथ आज़माया और साल 1960 में मशहूर कलाकार और अपने पूर्व शिक्षक जॉर्ज ग्रॉज़ पर आधारित एक वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) का निर्माण किया। ‘जॉर्ज ग्रॉज़ इंटररेग्नम’ वृत्तचित्र को अकादमी पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया, जबकि वेनिस फिल्म फेस्टिवल में पहला स्थान हासिल किया।

 

शिनासी की पुछल्ली ज़िंदगी

  अपनी ज़िंदगी के आख़िरी सालों में शिनासी ने अपना संस्मरण 'द रोड आई हैव ट्रैवल्ड' (1995) लिखा और प्रकाशित किया। शिनासी ने आई-कैट फ्रेम के आविष्कार के अलावा भी कई अन्य अनोखे और ख़ूबसूरत डिज़ाइन- पोर्ट्रेट कुर्सियाँ और बैचेज बनाएँ, जिन्हें वे चेयरएक्टर्स कहती थीं।

 

  ज़िंदगी के आख़िरी दिनों में शिनासी अपने चौथे पति, चित्रकार सेलेस्टिनो मिरांडा के साथ न्यू मैक्सिको में बस गई थीं। उन्होंने ज़िंदगी के अंत तक पेंटिंग करना जारी रखा था। साल 2014 में शिनासी के जीवन पर 'अल्टीना' नामक एक वृत्तचित्र भी रिलीज़ हुआ था।

 

 

कैट-आई जैसा एक और मशहूर चश्मा-फ्रेम ‘ब्रोलाइन’  

  'ब्रोलाइन चश्मा' चश्मों के फ्रेम की एक प्रचलित लोकप्रिय डिज़ाइन है, जिसमें लेंस को पकड़ने वाला बोल्ड ऊपरी भाग आँखों को घेरने वाली भौहों जैसा दिखता है। यह डिज़ाइन साल 1950 और 1960 के दशक के दौरान, ख़ासकर संयुक्त राज्य अमेरिका में, बहुत लोकप्रिय थे। इस चश्मा-फ्रेम का निर्माण पहली बार शूरॉन लिमिटेड के तत्कालीन उपाध्यक्ष ‘जैक रोहरबैक’ द्वारा साल 1947 में ‘रोनसिर’ ब्रांड के तहत किया गया था, जिसे कई अन्य निर्माताओं द्वारा कॉपी किया गया। चीनी प्रधानमंत्री ‘ली पेंग’ को ब्राउनलाइन चश्मा इस क़दर भाया कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी के आख़िरी 30 सालों में (चौथे चीनी प्रधानमंत्री कार्यकाल 1987-98 के साथ-साथ) इसे लगातार पहना।



 

 

 ~अंकुर




Friday, 4 August 2023

राहुल को राहत, सूरत कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई राह

 




      सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों की पीठ ने सूरत कोर्ट के मानहानि के मामले में राहुल गाँधी को दी गई सज़ा के फ़ैसले पर रोक लगा दी है। अब राहुल की संसद सदस्यता की अयोग्यता हट जाएगी। राहुल संसद में वापसी कर सकते हैं। साथ ही, वे संसद के ज़ारी मानसून सत्र में भी भाग ले सकते हैं, यदि संसदीय सचिवालय उनकी सदस्यता की बहाली करता है।

 

  जस्टिस बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की सुप्रीम कोर्ट पीठ में अन्य दो जज- पी. एस. नरसिम्हा और संजय कुमार थे।

 

क्या था मामला?

 ‘मोदी सरनेम मानहानि’ के मामले में गुजरात के सूरत कोर्ट ने जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत राहुल गाँधी को 2 साल की सज़ा सुनाई थी, जिससे उनकी वायनाड संसद सदस्यता ख़त्म हो गई थी। मानहानि का आरोप सूरत पश्चिम सीट से वर्तमान बीजेपी विधायक ‘पूर्णेश मोदी’ ने साल 2019 में लगाया था, जब राहुल गाँधी ने कोलार (कर्नाटक) की एक रैली में “मोदी चोर हैं” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।

 

क्या कहा सुप्रीम अदालत ने?

 जस्टिस गवई ने कहा कि “न्यायाधीश से अधिकतम सज़ा देने के लिए कारण बताने की अपेक्षा की जाती है, ख़ासकर जब अपराध “गैर-संज्ञेय, जमानती और समझौता योग्य हो''

  पीठ ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें अधिकतम दो साल की सज़ा देने का कोई कारण नहीं बताया है, जिसके कारण जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 (3) के तहत उन्हें अयोग्य घोषित किया गया था।

  हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गाँधी की खिलाफत में कहा कि “गाँधी की कथित टिप्पणी, यदि की गई, तो अच्छे स्वाद, अच्छे लहज़े में नहीं थी।“

 

'आपसी सम्मान की ज़रुरत' 

राहुल गाँधी के वकील मनु सिंघवी ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति के लिए जगह है। राजनीति में परस्पर सम्मान होना चाहिए।

 सुनवाई के दौरान, सिंघवी ने कहा कि “उन्होंने मानहानि का कोई अन्य मामला नहीं देखा है, जिसमें किसी आरोपी को अधिकतम दो साल की सज़ा दी गई हो।“

 

 ऐसे ही एक मामले में, इसी साल मार्च में ‘केरल उच्च न्यायालय’ ने लक्षद्वीप के सांसद और एनसीपी नेता ‘पी. पी. मोहम्मद’ फैजल के ख़िलाफ़ कवारत्ती जिला और सत्र न्यायालय द्वारा हत्या के प्रयास के मामले में दिए गए सज़ा के फ़ैसले को निलंबित कर दिया था।

 

क्या है मान/प्रतिष्ठा (Fame)?

 प्रतिष्ठा किसी व्यक्ति की ज़िंदगी का एक आंतरिक हिस्सा होती है। व्यक्ति अपने सम्मान और नाम की वैसे ही परवाह करते हैं, जैसे अपनी जान की करते हैं। ‘सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ (2016) के मामले में आपराधिक मानहानि के अपराध की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि “प्रतिष्ठा का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत संरक्षित है”। भारतीय दंड संहिता, 1860 के तहत भी “किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक बयान देकर या कुछ प्रकाशित करके उसकी प्रतिष्ठा पर हमला करने को” मानहानि माना गया है।

 

मानहानि के प्रकार

मानहानि दो प्रकार की होती है- परिवाद और बदनामी।

 एस.टी.एस राघवेंद्र चारी बनाम चेगुरी वेंकट लक्ष्मा रेड्डी (2018) के मामले में आंध्र प्रदेश’ के उच्च न्यायालय द्वारा परिवाद और बदनामी के बीच स्पष्ट अंतर किया गया था। बदनामी, एक झूठा और हानिकारक बयान है जो मौखिक रूप से एक अस्थायी प्रकृति का है। अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में पढ़े जाने पर परिवाद का व्यापक दायरा होता है। हालाँकि, बदनामी और परिवाद, दोनों को नुकसान पहुँचाने के लिए किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ झूठी टिप्पणियों के प्रकाशन की आवश्यकता होती है और इनमें अंतर प्रकाशन के तरीके में निहित होता है।

 

मानहानि का अपराध

‘भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 499, 500, 501 और 502 मानहानि के अपराध के संबंध में प्रावधान करती हैं। धारा-499 मानहानि और इसके अपवादों का व्यापक-विस्तृत उल्लेख करती है। इन प्रावधानों के अनुसार अपराध की तीन आवश्यक बातें हैं-

1.   अभियोग लगाना या प्रकाशित करना

2.   आरोपण का साधन

3.   प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने का इरादा

 

मानहानि का स्पष्टीकरण

मानहानि को स्पष्ट करने के लिए धारा-499 के साथ 4 स्पष्टीकरण हैं- 1. मृतकों की बदनामी, 2. किसी कंपनी की मानहानि या व्यक्तियों का संग्रह, 3. छल-कपट से मानहानि

 धारा-499 के स्पष्टीकरण 4 में कहा गया है कि यह किसी व्यक्ति की नैतिकता या बुद्धि को कम करने को संदर्भित करता है। साथ ही, किसी पर जातिगत टिप्पणी करना, उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाना या उसकी साख कम करना भी अपराध में शामिल होता है।

 

मानहानि के अपवाद

 

  धारा-499 में कुछ अपवाद हैं जो लोगों को ऐसे शब्द बोलने, लिखने या प्रकाशित करने की अनुमति देते हैं, जिन्हें मानहानिकारक सामग्री के तहत माफ़ किया जा सकता है; जैसे- किसी भी सार्वजनिक प्रश्न को छूने वाले किसी भी व्यक्ति का आचरण

  जब किसी सार्वजनिक प्रश्न के संबंध में सद्भावनापूर्वक कोई बयान दिया जाता है, तो उसे तीसरे अपवाद के तहत संरक्षित किया जाता है। उदहारण- ‘जवाहरलाल दर्डा बनाम मनोहरराव गणपतराव कपिस्कर (1998) के मामले में एक प्रकाशक, जिसने सरकारी धन के दुरुपयोग के संबंध में एक मंत्री के ख़िलाफ़ एक बयान प्रकाशित किया था, को मानहानि के अपराध का दोषी नहीं ठहराया गया था।

 

मानहानि के लिए सज़ा

  मानहानि के अपराध के लिए धारा 500, 501 और 502 में सजा का प्रावधान है, जिसके तहत साधारण कारावास से दंडित किया जाता है जिसे 2 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

    

विधायक/सांसद के दोषी होने की स्थिति में

   RPA की धारा-8(3) में कहा गया है कि यदि किसी सांसद को दोषी ठहराया जाता है और कम-से-कम 2 वर्ष की कैद की सज़ा सुनाई जाती है, तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है।

  हालाँकि, इस धारा में यह भी कहा गया है कि अयोग्यता दोषसिद्धि की तारीख़ से तीन महीने बीत जाने के बाद ही प्रभावी होती है।

  इस अवधि के भीतर सज़ायाफ्ता सांसद सज़ा के ख़िलाफ़ उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, जैसा कि राहुल गाँधी ने किया है।

 

भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सीमाएँ/मानहानि कानून

  संविधान का अनुच्छेद-19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है। हालाँकि, अनुच्छेद-19 (2) ने इस स्वतंत्रता की  कुछ सीमाएँ भी निर्धारित की हैं; जैसे- न्यायालय की अवमानना, मानहानि और अपराध के लिए उकसाना।

 

अन्य

‘मानहानि विधेयक (डिफेमेशन बिल), 1988 को राजीव गांधी सरकार के वक़्त में पेश किया गया था, लेकिन इसके कठोर प्रावधानों के कारण विपक्ष और मीडिया की व्यापक आलोचना के बाद इसे वापस ले लिया गया था।